गर्भावस्था के 7वें महीने मे गर्भवती के लिए 7 सावधानी!जानें।
प्रेगनेंसी की 7वें महीना मे क्या सावधानी बर्तना चाहिए?
प्रेगनेंसी की इस महीने मे बहुत सारे परिवर्तन शरीर होना शुरू हो जाता है, जिस से महिला परेशानी का मे नजर आने लगती है। जानकारी के आभाव मे उसे इस समय समझ मे नहीं आता हम क्या करें. और कैसे अपने इस वक़्त क़ो बेहतर बनाए. तो आये जानते हैँ वो 7 सावधानी जो जानना बेहद जरूरी होता है।
1:- शरीर मे सूजन आना :-प्रेगनेंसी के 7वें महीना मे शरीर मे सूजन आना आम बात है, ऐसे मे सोडियम यानि नमक का इस्तेमाल कम मात्रा मे करना चाहिये, जिससे सूजन का शरीर पर ज्यादाह प्रभाव ना हो और अच्छा महसूस हो।
2:- शरीर क़ो नमी बनाये रखें।
तरल पदार्थ अथवा पानी का ज्यादा इस्तेमाल करें। ताकि शरीर मे water Level बना रहें, जिससे बच्चे के विकाश अच्छी तरह से होता रहें। इसलिए ज्यादा से ज्यादा पानी पीते रहें।
3:- पेट के बल ना झुकें :-
गर्भवती के 7वें और 8वें महीना मे पेट के बल नहीं झुकना चाहिये, जिसके की बच्चे के ऊपर दबाव ना पड़े और नुकसान होने से बच सकें।
4:-ऐसा खाना न खाएं :-
गर्भवती महिला का इस समय कितना भी मन करें ना खाएं ज्यादाह तला हुआ या तैलिये पदार्थ, मसालायुक्त और जंक फ़ूड क़ो खाने से बचें। जिस से अपच्या, और कब्ज की समस्या हो सकती है। जिस से बेचैनी और परेशानी हो सकती है, अथवा इस प्रकार की हानिकारक खाना से बचना चाहिए।
5:- बाएँ करवट ले कर सोएं:-खासकर गर्भवती महिला क़ो 7वें और 8वें महीना मे बाएँ करवट लेकर सोना चाहिये। क्यूंकि इस समय पर्सव Mature होने लगता है। बाएँ करवट सोने से बच्चे क़ो सही मात्रा मे रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति हो पाती है, जिस से शिशु का विकाश अच्छी तरह से होने मे मदद मिलती है।इसलिए गर्भवती महिला क़ो बाएँ करवट लेकर सोना चाहिए, अगर ज्यादा देर बाएँ करवट सोने मे तकलीफ होती है तो, कुछ देर दाएं करवट ले कर सो सकते हैँ। लेकिन ध्यान रखना है की पीठ के बल ज्यादा समय तक सोना चाहिये।
6:- एक्सरसाइज (Exercise ) करें :- प्रेगनेंसी के 7वें और 8वें महीना मे गर्भवती महिला क़ो हर सुबह और शाम क़ो Deep Brithing (गहरी सांस लेने वाली) Exersise करने की आदत डालनी चाहिये,और दूसरे हल्का फुल्का व्ययाम (कसरत, वर्जिस )करें। चलते फिरते रहें, ताकि शरीर मे रक्त का परवाह सही मात्र मे होता रहें। जिससे से पर्सव के दौरान आसानी से पर्सव होने की संभावना बढ़ जाती है और साथ ही साथ पर्सव पीड़ा की सहने की क्षमता मे भी बढ़ोतरी हो जाती है। और Normal डिलेवरी की चांसेस बढ़ जाती है।
7:- पौस्टिक आहार का सेवन करें :- यदि आप सोचते हैँ की 6ठवां महीना निकल गया है अब पौस्टिक आहार लेने की ज्यादा जरूरत नहीं है, तो ऐसी सोच से बचें। क्यूंकि 6ठवां महीना निकलने के बाद 7वां महीने से baby का आकर (size) मे बढ़ोतरी होना शुरू हो जाता है, जिस से गर्भवती महिला क़ो ज्यादा से ज्यादा पौष्टीक आहार की जरूरत पड़ जाती है, ताकि बच्चे की विकाश अच्छी तरह से हो सके।
इसके लिए ज्यादा मात्रा मे carbohydrate, Protin और अन्य Vitamins की जरूरत पड़ती है। जिसका सही मात्रा मे लेना चाहिए।
इस प्रकार हम ऊपर दिए गए सभी नियमों का पालन कर के अपनी सवस्थ को बेहतर बनाये रख सकते हैं और कई परेशानियों से भी बच सकते हैं।







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