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Showing posts from April 18, 2021

मिशाल ऐसा कि दिल जिन्दा कर दे। पैसा और जिंदगी।

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जबरदस्त मिसाल है पैसा और दिल पाक करने कि। जकात क़ो समझना बहुत ही जरूरी है। इसे समझते निचे दिए गए मिशाल के जरिये। हम, "तरबूज" खरीदते हैं. मसलन 5 किलो  का एक नग, जब हम इसे खाते हैं तो पहले इस का मोटा छिलका  उतारते  हैं. 5 किलो में से कम से कम 1किलो छिलका  निकलता है. यानी तकरीबन 20% क्या इस तरह 20% छिलका जाया होने का हमे अफसोस होता है? क्या हम परेशान होते हैं. क्या हम सोचते हैं के हम  तरबूज को ऐसे ही छिलके के साथ खालें.  नही बिलकूल नाही! यही हाल केले, अनार, पपीता और दीगर फलों का है. हम खुशीसे छिलका उतार कर खाते हैं, हालांके हम ने इन फलों को छिलकों समेत खरीदा होता है. मगर छिलका  फेंकते  वक्त हमे बिल्कुल  तकलीफ  नाही  होती. इसी तरह मुरगी बकरा साबीत खरीदते हैं. मगर जब खाते हैं, तो इस के बाल,खाल वगैरे निकाल कर फेंक देतें हैं. क्या इस पर  हमें कुछ दुःख  होता है ? नही और हरगीज नही। तो फिर 40 हजार मे से 1 हजार देने पर 1लाख मे से 2500/-रूपये  देने पर क्यो हमें बहुत तकलीफ होती है ? हालांके ये सिर्फ  2.5% बनता है या...